Human movements are made possible through contraction of skeletal muscles. It’s important to learn about Types Of Muscles Contraction.
शरीर की किसी भी गति जैसे चलना, भार उठाना, सीढ़ी चढ़ना आदि करने के लिए जोड़ों (अस्थियों) को गति करनी पड़ती है। और अस्थियों को गति कराने के लिए पेशियां (मसल्स muscles) संकुचित (contract) हो कर शक्ति पैदा करती है जिससे अंग की गति संभव हो पाती है।
हमारे सभी यांत्रिक कार्य जैसे चलना दौड़ना सीढ़ी चढ़ना वजन उठाना उठना बैठना आदि हमारी मांस पेशियों के संकुचन द्वारा संभव हो पाते हैं
ऐच्छिक पेशियां (स्केलेटल मसल्स) के कार्य
- स्केलेटल मसल्स द्वारा उत्पन्न ऊर्जा के कारण शरीर के अंगों की गतियां संभव हो पाती हैं
- शरीर व जोड़ों को सहारा व posture प्रदान करती है।
- शरीर में उष्मा का उत्पादन वह नियमन करती है।
- स्केलेटल मसल्स उन्हें उत्तेजित किए जाने पर ही संकुचित अथवा फैलती हैं। स्नायु तरंगे (Nerve Impulses) इन्हें उत्तेजित करने का कार्य करती हैं।
- स्केलेटल मसल्स अपनी अपनी वर्गीकृत ताकत के अनुसार संकुचित होती हैं
- फ्लैक्सर (Flexor) और एक्सटेन्सर (Extensor) स्केलेटल मसल्स जोड़ों की अस्थियों में खिंचाव उत्पन्न करके गति को संभव बनाती हैं
- स्केलेटल मसल्स हमेशा समूह में कार्य करती हैं
पेशीय संकुचन के प्रकार (Types of Muscle Contraction)
शरीर की किसी भी गति जैसे चलना, भार उठाना, सीढ़ी चढ़ना आदि करने के लिए जोड़ों (अस्थियों) को गति करनी पड़ती है। और अस्थियों को गति कराने के लिए पेशियां (मसल्स muscles) संकुचित (contract) हो कर शक्ति पैदा करती है जिससे अंग की गति संभव हो पाती है।
स्केलेटल मसल्स 3 तरीकों से संकुचित होती है
- आइसोटोनिक कंट्रक्शन
- आइसोमेट्रिक कंट्रक्शन
- आइसोकाइनेटिक कंट्रक्शन
आइसोटोनिक संकुचन (Isotonic Contraction)
(यह 2 प्रकार का होता है) 👇
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कनसेन्ट्रिक संकुचन (Concentric Contraction)
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इक्सेन्ट्रिक संकुचन (Eccentric Contraction)
अधिकांश शारीरिक गतिविधियों (जैसे चलना, दौड़ना, तैरना, साइकिल चलाना आदि) के दौरान मांसपेशियों में आइसोटोनिक संकुचन (Isotonic Contraction) होता है। आइसोटोनिक संकुचन में मसल की लंबाई बदलती रहती है अर्थात जब हम कोई कार्य करते हैं उस समय मसल्स को लगातार कार्य करना पड़ता है
चलना, दौड़ना, तैरना, सीढ़ी चढ़ना, वजन उठाना और साइकिल चलाना जैसी गतिविधियाँ आइसोटोनिक क्रियाओं (व्यायाम) के प्रमुख उदाहरण हैं।
आइसोटोनिक कंट्रक्शन (Isotonic Contraction) में दो प्रकार का संकुचन होता है।-
- कनसेन्ट्रिक संकुचन 2. इक्सेन्ट्रिक संकुचन
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कनसेन्ट्रिक संकुचन (Concentric Contraction)
- इस संकुचन में मसल में शक्ति पैदा करने के लिए तनाव उत्पन्न होता है जिसमें मसल में तनाव लगातार बढ़ने के साथ मसल की लम्बाई कम हो जाती है एवं मसल का मध्य भाग थोड़ा फूल जाता है और मसल कठोर हो जाती है।
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Concentric Contraction यह संकुचन तब होता है जब जोड़ पर फ्लेक्शन (Flexion) होता है, जिसमें जोड़ों की हड्डियां आपस में नजदीक आती है तथा उनके बीच का कोण कम होता जाता है। उदाहरण– ऐसा संकुचन जिम में डंबल उठाते समय बाइसेप्स मसल में होता है।
इक्सेन्ट्रिक संकुचन (Eccentric Contraction)
यह कंसंट्रिक्स संकुचन का विपरीत संकुचन है जिसमें संकुचित मसल का तनाव कम होता जाता है मसल की लंबाई बढ़ती जाती है तथा मसल का फूला हुआ मध्य भाग सामान्य अवस्था में आ जाता है।
Eccentric Contraction - इक्सेन्ट्रिक संकुचन (Eccentric Contraction) में जोड़ पर एक्सटेंशन (Extension) होता है जिसमें जोड़ की हड्डियां एक दूसरे से दूर होती है तथा उनके बीच का कोण बढ़ जाता है।उदाहरण- मुड़े हुए हाथ को सीधा करना
आइसोमेट्रिक संकुचन (Isometric Contraction)
- आइसोमेट्रिक संकुचन में मसल लगातार तनाव की स्थिति में रहती है और मसल की लंबाई में परिवर्तन भी नही होता है।
- अर्थात आइसोमेट्रिक संकुचन (Isometric Contraction) में मसल एक ही स्थिति में संकुचित एवं स्थिर रहती है परंतु अंग में कोई गति नहीं होती।उदाहरण- किसी विशेष अवस्था में स्थिर हो जाना जैसे कुर्सी आसन और नौकासन
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Isometric Contraction Naukasana (नौकासन) आइसोकाइनेटिक संकुचन (Isokinetic Contraction)
Isokinetic Contraction - आइसोटोनिक एवं आइसोमेट्रिक कांट्रेक्शन के अलावा एक और विशेष प्रकार का कांट्रेक्शन होता है जिसे आइसोकाइनेटिक कॉन्ट्रक्शन कहते हैं
- आइसोकाइनेटिक संकुचन में पूरे मसल के फ्लेक्शन अथवा एक्सटेंशन के दौरान मसल्स पर तनाव की मात्रा एक समान रहती है।
- सामान्य जीवन में प्रायः आइसोकाइनेटिक संकुचन नहीं होता है परंतु कुछ क्रियाओं जैसे पानी के अंदर तैरना आदि में आइसोकाइनेटिक संकुचन का अनुभव होता है।आइसोकाइनेटिक कांट्रेक्शन पैदा करने के लिए कुछ विशेष प्रकार की मशीनें होती है जिनके द्वारा मसल्स पर तनाव की मात्रा को फिक्स किया जा सकता है। जिनका उपयोग उच्च स्तर के एथलीटों द्वारा अपनी ट्रेनिंग के दौरान किया जाता है।
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Well explained Professor sahab….very relevant and worthy for students, those who prefer Hindi language.
Thanks for your support sir.
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