Common Sports Injuries

Common-Sports-Injuries

Injuries are a common occurrence in everyday life but the possibility of injury is higher in physical education and sports activities. There can be many reasons for a player getting injured or falling ill in sports. Many times players suffer normal injuries and sometimes they have to undergo emergency treatment. Sports injury is not always related to sports activities, this problem can happen to anyone in normal life. Injuries caused in normal activities of life can also be called sports injuries.

 

आम जीवन में चोट लगना एक सामान्य घटना है परंतु शारीरिक शिक्षा एवं खेल गतिविधियों में चोट लगने की संभावनाएं अधिक होती हैं। 

खेलों में खिलाड़ी को चोट लगने या उसका स्वास्थ्य खराब होने  के अनेक कारण हो सकते हैं। कई बार खिलाड़ियों को सामान्य चोट आती है तो कई बार इमरजेंसी में इलाज करवाने जैसी नौबत भी आ जाती है। स्पोर्ट्स इंजरी हमेशा खेलकूद की क्रिया से ही जुड़ी नहीं होती है आम जीवन चर्या में ये समस्या किसी को भी हो सकती है। जीवन की सामान्य गतिविधियों में लगने वाली चोटों को भी स्पोर्ट्स इंजरी कहा जा सकता है

चोट की परिभाषा (INJURY)

शरीर के किसी अंग को किसी बाहरी अथवा आंतरिक कारणों जैसे प्रहार, आघात, गिरना, फिसलना, टक्कर आदि से अंग को नुकसान पहुंचना, दर्द होना एवं उसकी कार्य-क्षमता (Performance) कम हो जाने की घटना को चोट लगना कहते हैं।

आम जीवन में लगने वाली सामान्य चोटें

  • स्ट्रेन Strain (अत्यधिक खिंचाव अथवा दबाव)

  • स्प्रेन Sprain (मोच आना)

  • खरोंच एवं रगड़ जाना  (Abrasion)

  • त्वचा का कट जाना (Laceration)

  • डिसलोकेशन Dislocation (संधि विस्थापन)

  • फ्रैक्चर Fracture (हड्डी टूटना – अस्थि भंग)

1- स्ट्रेन (Strain)

स्ट्रेन मांसपेशी तथा टेन्डन (Tendon) (पेशी को अस्थि से जोड़ने वाले तंतु) की चोट है। मांसपेशी पर अत्यधिक खिंचाव या संकुचन होने के कारण मांसपेशी-टेंडन के तंतु अपनी क्षमता से अधिक खिंच जाते हैं तथा आंशिक अथवा पूर्ण रूप से टूट जाते हैं। जिससे तेज दर्द एवं कार्य क्षमता  में कमी आती है।

लंबे समय तक अत्यधिक खिंचाव या दबाव सहने (ओवरयूज) के कारण भी स्ट्रेन हो जाता है। जैसे ऐड़ी एवं कोहनी के टेन्डन में स्ट्रेन। कुछ कोहनी के स्ट्रेन को टेनिस एल्बो (Tennis Elbow)भी कहा जाता है।

 

2- स्प्रेन (Sprain मोच आना) –

स्प्रेन लिगामेंट (Ligament) (जोड़ों को बांध कर स्थिर रखने वाले स्नायु बंधन) की चोट है। किसी जोड़ के अपनी एनाटॉमिकल सीमा (Anatomical Limit) से अधिक मुड़ जाने पर उसके लिगामेंट भी खिंच जाते हैं तथा वे अपनी मूल अवस्था में रिकवर नहीं कर पाते हैं जिससे तीव्र दर्द होता है, गंभीर मोच आने पर लिगामेंट टूट अथवा फट भी सकते हैं। इस स्थिति को मोच आना कहते हैं।

स्प्रेन (मोच) खेलों में सबसे अधिक लगने वाली चोट है।

 

3- खरोंच एवं रगड़ जाना  (Abrasion)

खरोंच एवं रगड़ जाना को अब्रेशन (Abrasion) कहते हैं जो कि त्वचा के किसी खुरदुरी जगह पर रगड़ने की वजह से हो सकती है। इसे स्क्रैप ( Scrape ) या ग्रेज ( Graze ) भी कहते हैं। अगर खरोंच किसी सख्त जगह जैसे कि सड़क पर रगड़ने की वजह से हुई है तो इसे रोड रैश ( Road Rash ) भी कह सकते हैं।ऐसी खरोंच दर्दनाक होती हैं। आमतौर पर खरोंच गहरे घावों के मुकाबले कम खतरनाक होती है और ज्यादा खून नहीं बहता इसलिए इसका इलाज घर पर भी किया जा सकता है।

4- त्वचा का कट जाना (घाव/कटाव) – Laceration 

 

कट या घाव किसी नुकीली चीज जैसे चाकू या कांच के टुकड़े के त्वचा के संपर्क में आने से होता है। घाव त्वचा घाव त्वचा के कटने की चोट है जोकि कील, कांटेदार तार या मशीनरी जैसी किसी दांतेदार चीज़ के कारण होती है।   कटने और फटने से ऊपरी त्वचा और अंतर्निहित ऊतकों को चोट लग सकती है। कट या घाव को खुले घावों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और आम तौर पर इसमें कम या अधिक रक्तस्राव होता है।

5- संधि-विस्थापन – (डिसलोकेशन Dislocation)- जब चोट के कारण किसी जोड़ पर मिलने वाली अस्थियों के सिरे अपनी मूल अवस्था से विस्थापित हो जाते हैं अथवा अस्थियां अपने कोटर से बाहर निकल जाती हैं इस स्थिति को संधि-विस्थापन अथवा डिसलोकेशन कहा जाता है। जिसमें तीव्र दर्द होता है तथा अंग की गति करना संभव नहीं होता है।

Dislocation of Knee Joint
Shoulder dislocation

6- फ्रैक्चर – अस्थि भंग (Fracture हड्डी टूटना)-

किसी अस्थि पर तीव्र दवाब, प्रहार अथवा झटका लगने के कारण अस्थि में दरार पड़ने या अस्थि के टूटने की स्थिति को फ्रैक्चर (अस्थिभंग) कहते हैं। कभी कभी किसी अस्थिरोग (जैसे अस्थि की टीबी और कैंसर) के कारण अस्थियां कमजोर हो जाती है तथा मामूली दबाव अथवा झटके से भी टूट जाती हैं। फ्रैक्चर के कारण असहनीय पीड़ा होती है तथा अंग का मूवमेंट असंभव हो जाता है

 

फ्रैक्चर के प्रकार

types of fracture
  1. हड्डी में बाल आना (Hairline Fracture)- इस फ्रैक्चर में हड्डी की आकृति में बिना परिवर्तन आए बारीक दरार पड़ जाती है

  2. ग्रीन स्टिक फ्रैक्चर (Greenstick fracture)- यह फ्रैक्चर अक्सर छोटे बच्चों की कोमल हड्डियों में होता है जिसमें हड्डी मुड़ जाती है अथवा उसमें एक सिरे से दरार आ जाती है।

  3. साधारण फ्रैक्चर (Simple Fracture)- इसमें हड्डी एक स्थान से टूट जाती है परंतु त्वचा नहीं

  4. मिश्रित फ्रैक्चर (Compound Fracture)- इसमें हड्डी टूटने के साथ-साथ त्वचा टूटी हड्डी का सिरा त्वचा फाड़ कर बाहर आ जाता है जिससे इंफेक्शन (संक्रमण) का खतरा बढ़ जाता है।

  5. मल्टीपल फ्रैक्चर (Multiple Fracture)- इस फ्रैक्चर में हड्डी एक से अधिक स्थानों से टूट जाती है।

  6. कमिनूटेड फ्रैक्चर (Comminuted Fracture)- इसमें हड्डी एक से अधिक स्थानों पर टूटने के साथ कई टुकड़े हो जाते हैं। इस प्रकार का फ्रैक्चर अक्सर रोड एक्सीडेंट में टक्कर हो जाने के कारण होते हैं

  7. इंपैक्टेड फ्रैक्चर (Impacted Fracture)- इस फ्रैक्चर में हड्डी टूटने के साथ उसके सिरे एक दूसरे में घुस जाते है

  8. स्पाइरल फ्रैक्चर (spiral fracture)- इस फ्रैक्चर में अस्थि घुमावदार बल (twisting force) के साथ टूट जाती है

impacted fracture

गंभीर मोच अथवा फ्रैक्चर होने पर आवश्यक रूप से मेडिकल सहायता की आवश्यकता पड़ती है। परंतु घायल व्यक्ति तक मेडिकल सहायता पहुंचने तक उसका प्राथमिक उपचार PRICE के सिद्धांत पर किया जाता है।

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First Aid and Principle of PRICER (प्राथमिक चिकित्सा)

 

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