To make this world a better place to live it’s essential to enable people with physical Disability and Mental Retardation to live a normal life so that they do not get left away from the mainstream of normal social life.
Ensuring the participation of every individual in physical education and sports programs is essential for living a physically and mentally healthy and active life. However, some people become victims of physical disability or mental retardation due to congenital or acquired reasons, which affects their normal activities, working capacity, learning ability, and social adjustment. Their quality of life can be improved through proper training, rehabilitation, and inclusive education.
शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन जीने के लिए शारीरिक शिक्षा एवं खेलों के कार्यक्रमों में प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।
परन्तु कुछ लोग में जन्मजात या अर्जित कारणों से शारीरिक दिव्यांगता अथवा मानसिक मंदता के शिकार हो जाते हैं, जिससे उनकी सामान्य क्रियाएँ, कार्य क्षमता, सीखने की क्षमता और सामाजिक समायोजन प्रभावित होते हैं। उचित प्रशिक्षण, पुनर्वास एवं समावेशी शिक्षा द्वारा इनके जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है।
दिव्यांगता के प्रकार 👇
शारीरिक दिव्यांगता (Physical Disability)
जब शरीर के किसी अंग, मांसपेशी, हड्डी या तंत्रिका तंत्र में ऐसी कमी या विकार हो जाए जिससे व्यक्ति की चलने-फिरने, पकड़ने, संतुलन बनाने या दैनिक कार्य करने की क्षमता प्रभावित हो जाए, तो उसे शारीरिक दिव्यांगता (Physical Disability) कहा जाता है।
शारीरिक दिव्यांगता के प्रमुख लक्षण
चलने-फिरने में कठिनाई या सहारे की आवश्यकता
हाथ-पैरों की कमजोरी या लकवा
संतुलन और समन्वय की कमी
मांसपेशियों का कठोर या ढीला होना
दैनिक गतिविधियों ( चलना, बैठना, उठना, पकड़ना) में परेशानी
दैनिक कार्यों को करने के लिए दूसरों पर निर्भरता
शारीरिक दिव्यांगता के कारण
1. जन्मजात कारण –
गर्भावस्था में संक्रमण
आनुवंशिक विकार
समय से पहले जन्म हो जाना
2. जन्म के बाद के कारण –
दुर्घटना या चोट
पोलियो, सेरेब्रल पाल्सी आदि रोग
कुपोषण
तंत्रिका तंत्र की बीमारी
शारीरिक दिव्यांगता के कारण कार्यात्मक सीमाएँ
स्वतंत्र रूप से चलने-फिरने में असमर्थता
खेल एवं शारीरिक गतिविधियों में सीमित भागीदारी
आत्मनिर्भरता की कमी
सामाजिक सहभागिता में बाधा
शारीरिक दिव्यांगता के निवारण एवं उपाय
# गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल व टीकाकरण
# समय पर चिकित्सा उपचार और फिजियोथेरेपी
# सहायक उपकरण (व्हीलचेयर, कैलिपर, कृत्रिम अंग)
# विशेष व्यायाम व अनुकूलित शारीरिक शिक्षा कार्यक्रम
# सामाजिक सहयोग और समावेशी खेल गतिविधियाँ
मानसिक मंदता
(Mental Retardation)
जब किसी व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता (IQ), सीखने की गति, तर्क-शक्ति और सामाजिक अनुकूलन क्षमता सामान्य से काफी कम हो तथा यह स्थिति बचपन से ही विद्यमान हो, तो उसे मानसिक मंदता कहा जाता है।
प्रमुख लक्षण
# सीखने में अत्यधिक धीमापन
# भाषा विकास में देरी
# ध्यान और स्मरण शक्ति कमजोर
# निर्णय लेने की क्षमता कम
# सामाजिक व्यवहार में अपरिपक्वता
# दैनिक कार्यों में दूसरों पर निर्भरता
कारण
1. जन्म से पूर्व –
# आनुवंशिक विकार
# गर्भावस्था में कुपोषण या संक्रमण
# नशीले पदार्थों का सेवन
जन्म के समय –
# ऑक्सीजन की कमी
# समय से पूर्व या कठिन प्रसव
जन्म के बाद –
# मस्तिष्क संक्रमण
# सिर में चोट
# गंभीर कुपोषण
# सामाजिक उपेक्षा
मानसिक मंदता के कारण कार्यात्मक सीमाएँ
# शैक्षणिक उपलब्धि कम
# सामान्य निर्देशों को समझने में कठिनाई
# आत्म-देखभाल कौशल सीमित
# सामाजिक समायोजन में कठिनाई
# स्वतंत्र जीवन जीने में असमर्थता
मानसिक मंदता के निवारण एवं उपाय
# गर्भवती महिलाओं की पोषण व स्वास्थ्य देखभाल
# नवजात शिशु की नियमित जांच व टीकाकरण
# प्रारंभिक पहचान और विशेष शिक्षा
# व्यवहार चिकित्सा, व्यावसायिक प्रशिक्षण
# सरल एवं अनुकूलित शारीरिक गतिविधियाँ
# परिवार व समाज का सहयोग
शारीरिक दिव्यांगता और मानसिक मंदता से ग्रस्त लोगों के लिए शारीरिक शिक्षा का महत्त्व
शारीरिक दिव्यांग और मानसिक मंदता से ग्रस्त लोगों को खेल एवं शारीरिक शिक्षा गतिविधियों से जोड़ने के लिए शारीरिक शिक्षा की एक नई शाखा विकसित की गई है जिसे अनुकूलित शारीरिक शिक्षा कहा जाता है। जिसमें शारीरिक दिव्यांग और मानसिक मंदता से ग्रस्त लोगों की सीमाओं एवं आश्यकताओं को ध्यान में रखकर खेल एवं शारीरिक शिक्षा के कार्यक्रम विकसित किए जाते हैं। जिससे शारीरिक दिव्यांग और मानसिक मंदता से ग्रस्त लोगों को निम्न लाभ होते हैं
# आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और आत्म सम्मान बढ़ता है।
# मांसपेशियों की शक्ति, संतुलन और समन्वय में सुधार होता है।
# सामाजिक सहभागिता और भावनात्मक संतुलन विकसित होता है।
# शारीरिक दिव्यांग और मानसिक मंदता से ग्रस्त लोग भी सामान्य जीवन जीने का अवसर प्राप्त करते हैं
# पुनर्वास प्रक्रिया तेज होती है।
निष्कर्ष
शारीरिक दिव्यांगता और मानसिक मंदता के कारण व्यक्ति की क्षमताएं सीमित अवश्य करती हो जाती हैं, परंतु उचित चिकित्सा, विशेष शिक्षा, अनुकूलित खेल, व्यायाम, शारीरिक शिक्षा कार्यक्रम और सामाजिक समर्थन द्वारा उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जा सकता है। शारीरिक शिक्षा इस दिशा में अत्यंत प्रभावी माध्यम सिद्ध होती है, क्योंकि यह न केवल शारीरिक विकास बल्कि मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक सशक्तिकरण भी प्रदान करती है।