Motivation is the prime catalyst to excel in any field of life. Motivation is the power which prompts a person to take a task in hands and complete it.
जीवन के किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरणा प्रमुख उत्प्रेरक होता है। प्रेरणा ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को किसी कार्य को हाथ में लेकर उसे पूरा करने के लिए प्रेरित करती है।
Regarding motivation following points are discussed in this article 
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प्रेरणा Motivation
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अर्थ एवं परिभाषा
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आवश्यकताएं एवं उद्देश्य
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प्रेरणा के प्रकार
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खेल एवं शारीरिक शिक्षा में प्रेरणा का महत्व
किसी भी कार्य को करने के लिए अभिप्रेरणा अथवा प्रेरणा (Motivation) का बहुत अधिक महत्व होता है। अभिप्रेरणा का संबंध उन कारकों से है जो व्यक्ति को किसी कार्य को करने के लिए तत्पर (prompt) अथवा तैयार (ready) कर देते हैं।
सीखने की प्रक्रिया (Learning Process) पर भी प्रेरणा का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। सीखने की प्रक्रिया के दौरान कई बार उतार-चढ़ाव आते हैं। कभी-कभी सीखने की प्रक्रिया में कठिनाई होने पर छात्र अथवा खिलाड़ी हतोत्साहित एवं निराश हो जाते हैं तथा अपना प्रयास छोड़ देते हैं जिससे सीखने की प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
परंतु यदि सीखने के पीछे प्रबल प्रेरणा हो तो विद्यार्थी अपने सीखने के प्रयासों को पूरी ऊर्जा से जारी रखता है और अंततः उसकी सीखने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण होती है।
जैसे एक छोटा बच्चा साइकिल सीखने की प्रक्रिया के दौरान कई बार गिरता है चोट खाता है परंतु उसकी सीखने की इच्छा इतनी इतनी प्रबल होती है कि वह सीखना नहीं छोड़ता है। वह कई बार गिरता है फिर संभलता है और अंततः वह साइकिल चलाना सीख ही जाता है। यह उसके अंदर उसकी अदम्य इच्छा ही होती है जो कि उसे कई असफलताओं के बावजूद साइकिल चलाते रहने के लिए प्रेरित करती है।
प्रेरणा एक ऐसी आंतरिक शक्ति (internal power) है जो व्यक्ति के भीतर निहित होती है, वही शक्ति उसे किसी कार्य को करने के लिए उत्तेजित एवं प्रोत्साहित करती है और उसी से व्यक्ति का व्यवहार नियंत्रित एवं संचालित होता है।
अभिप्रेरणा को मनोविज्ञान के क्षेत्र का एक अभिन्न अंग माना जाता है।
अभिप्रेरणा अथवा प्रेरणा को अंग्रेजी में Motivation कहते हैं। Motivation शब्द की व्युत्पति लैटिन भाषा के मोवेयर ( Moveers) शब्द से हुई है । जिसका अर्थ है ‘To Move’ अर्थात ‘चलना’ होता है।
प्रेरणा का तात्पर्य व्यक्ति की उस आंतरिक स्थिति से है जो किसी विशेष परिस्थिति में व्यक्ति के अंदर किसी कार्य को करने की तीव्र इच्छा उत्पन्न कर देती है तथा उसे अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रेरित एवं क्रियाशील कर देती है।
प्रेरणा वह बल है जो प्राणी को एक विशेष प्रकार का व्यवहार करने एवं निश्चित दिशा में चलने के लिए तत्पर कर देती है।
प्रेरणा के स्तर से ही तय होता है कि व्यक्ति किस प्रकार किसी कार्य को प्रारंभ करता है तथा उसे पूर्ण ऊर्जा के साथ जारी रखता है। यदि उसकी प्रेरणा का स्तर बहुत ऊंचा है तो उसका प्रदर्शन उन लोगों की तुलना में कहीं बेहतर होगा जिनका प्रेरणा का स्तर काफी निम्न है।
प्रेरणा की परिभाषा –
प्रेरणा व्यक्ति की वह आंतरिक दशा है जो व्यक्ति को किसी विशेष कार्य करने के लिए सक्रिय कर देती है तथा उसके व्यवहार को उद्देश्य प्राप्ति की दिशा में अग्रसर करती है।
प्रेरणा एवं अभिप्रेरणा शब्द समानार्थी प्रतीत होती है परंतु इनमें एक सूक्ष्म अंतर होता है।
अभिप्रेरणा से तात्पर्य उन तत्वों से है जोकि व्यक्ति के अंदर प्रेरणा को जागृत करते हैं।
कई मनोवैज्ञानिकों ने प्रेरणा को निम्न तरह से परिभाषित किया है
मैक्डूगल के अनुसार ,
अभिप्रेरणा वे शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दशाएं हैं, जो किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करती हैं।
मरे के अनुसार,
प्रेरणा व आंतरिक कारक है जो व्यक्ति के व्यवहार को जागृत, निर्देशित तथा व्यवस्थित करता है
वुडवर्थ के अनुसार,
प्रेरित होना व्यक्ति की वह दशा है जो उसे निश्चित व्यवहार करने के लिए और निश्चित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए उत्तेजित करती है।
एटकिंसन के अनुसार,
अभिप्रेरणा एक या एक से अधिक प्रभाव उत्पन्न करने वाली क्रिया की मनोवृति का उत्प्रेरक शब्द है।
Hoy & Miskel के अनुसार
प्रेरणा वह जटिल बल (force), प्रेरक (drive), मांग (need), तनाव (anxiety) या अन्य शक्ति है जो व्यक्ति को लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रयास को शुरू करवाती है तथा उसके प्रदर्शन स्तर को बनाए रखती है
गेट्स के अनुसार,
अभिप्रेरणा प्राणी भीतर वह शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक दशा है, जो उसे किसी विशेष परिस्थिति में विशेष प्रकार की प्रतिक्रिया करने के लिए प्रेरित करती है।
आवश्यकताएं (Needs)
कोई भी कार्य बिना आवश्यकता के नहीं किया जाता है। आवश्यकताएं अर्थात जरूरतें वे सामान्य मांगे अथवा इच्छाएं हैं जो कि व्यक्ति को किसी विशेष कार्य को करने के लिए प्रेरित करती है। आवश्यकताएं ही व्यक्ति के व्यवहार का आधार बनती है।
आवश्यकताओं का स्वरूप 3 प्रकार का हो सकता है
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जैविक (Biological),
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सामाजिक (Social)
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मनोवैज्ञानिक (Psychological)
जैविक आवश्यकताएं (Biological Needs):
भूख (Hunger), प्यास (Thirst), स्वास्थ्य (Health), वासना (Sex) आदि जैविक आवश्यकताओं में आते हैं। यह वे आवश्यकताएं होती हैं जो की एक विशेष परिस्थिति आने पर शरीर स्वतः अनुभव करता है।
सामाजिक आवश्यकताएं (Social Needs):
सामाजिक स्तर (Social Standard), आर्थिक स्तर (Economic Standard), सामाजिक मान्यता (Social Acceptance), सामाजिक सम्मान (Reputation), पारिवारिक दायित्व (Family Duties), सुरक्षा ( Safety) आदि सामाजिक आवश्यकताएं हैं जिसकी आंकाक्षा प्रत्येक व्यक्ति के मन में होती है
मनोवैज्ञानिक आवश्यकताएं (Psychological Needs):
प्रेम (Love), अपनापन (Affection), सम्मान (Respect), संतुष्टि (Satisfaction), प्रसन्नता (Happiness), रुचि (Interest), श्रद्धा (Devotion), निष्ठा (Dedication) आदि मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं के अंतर्गत आते हैं।
यह व्यक्ति की प्रकृति (Nature) पर निर्भर करता है कि कौन सी आवश्यकता उसे किसी विशेष कार्य को करने के लिए प्रेरित कर दे। एक अच्छे अध्यापक अथवा कोच का यह कर्तव्य होता है कि वह अपने विद्यार्थियों के लिए उचित प्रेरणा के माध्यम की पहचान करे।
उद्देश्य (Motives) –
उद्देश्य अथवा मोटिव शब्द का शाब्दिक अर्थ है किसी कार्य को करने के लिए कोई कारण का होना।
किसी कार्य को करने के पीछे का कारण ही उसे निरंतर प्रयत्न करने तथा एक निश्चित उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए प्रेरित करता रहता है।
कई बार व्यक्ति उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए अनेक कार्य करता है।
अनेक कार्यों की पीछे एक उद्देश्य हो सकता है तथा एक ही कार्य के पीछे अनेक उद्देश्य भी हो सकते हैं।

प्रेरणा के प्रकार (Types of Motivation)-
किसी कार्य को करने अथवा सीखने के लिए उत्प्रेरक बल को प्रेरणा कहते हैं यह बल व्यक्ति के अंतर्मन में जागृत तीव्र उत्कंठा अथवा इच्छा हो सकती है अथवा यह किसी कार्य के प्रति बाहरी आकर्षण भी हो सकता है।
इस आधार पर प्रेरणा को दो वर्गों में बांटा जा सकता है 
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आंतरिक प्रेरणा (intrinsic motivation)
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बाहरी प्रेरणा (extrinsic motivation)
आंतरिक प्रेरणा (intrinsic motivation) –
आंतरिक प्रेरणा से तात्पर्य व्यक्ति के अंदर किसी कार्य के प्रति प्राकृतिक रूप से प्रबल उत्कंठा, इच्छा अथवा रूचि का होना है। ऐसे व्यक्ति सकारात्मक मनोवृति के होते हैं तथा वे हमेशा स्वत: प्रेरित (self motivated) रहते हैं।
जब व्यक्ति किसी कार्य को करने में आनंद एवं संतोष का अनुभव करता हो तथा वह अपने उद्देश्यों के प्रति पूर्ण समर्पित हो तो उसे आंतरिक रूप से प्रेरित कहा जाता है। यह एक प्राकृतिक गुण हैं जो कि व्यक्ति को दक्षता के उच्च स्तर तक ले जाता है।
अध्यापक एवं कोच खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सुधारने के लिए विभिन्न तरीके से ट्रेनिंग देते हैं परंतु यदि खिलाड़ी आंतरिक रुप से प्रेरित हो तो तथा वह अपने उद्देश्यों के प्रति पूर्ण समर्पित हो तो उसके सीखने की प्रक्रिया एवं उसके प्रदर्शन में तीव्र सुधार होने की संभावना अधिक होती है।
बाहरी प्रेरणा (extrinsic motivation) –
जब कोई व्यक्ति या एथलीट किसी बाहरी आकर्षण, बल, मजबूरी, पुरस्कार, प्रलोभन अथवा भय के कारण कोई कार्य करता है तो इसे बाहरी प्रेरणा कहते हैं।
प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति अलग-अलग प्रकार की होती है अतः प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग प्रकार का बाहरी प्रेरणा उपयुक्त होती है।
पुरस्कार, दंड, सम्मान, प्रशंसा, भर्तस्ना, भय, लालच, आकर्षण, प्रसिद्धि, आर्थिक लाभ आदि बाहरी प्रेरणा के प्रकार हैं।
अक्सर इस बात की चर्चा होती है कि आंतरिक एवं बाहरी प्रेरणा में कौन अधिक कारगर है।
खिलाड़ी का आंतरिक रुप से प्रेरित होना अच्छी बात है परंतु एक सीमा के बाद खिलाड़ी को अपना प्रयास जारी रखने के लिए बाहरी प्रेरणा की आवश्यकता भी होती है। यदि उसके साथ पुरस्कार, सम्मान एवं प्रशंसा के रूप में बाहरी प्रेरक तत्वों का समावेश कर दिया जाए तो यह खिलाड़ी के प्रदर्शन को सुधारने में बहुत सहायक होता है।
शारीरिक शिक्षा एवं खेलों में प्रेरणा का महत्व –
शारीरिक शिक्षा एवं खेल गतिविधियों में प्रेरणा का बहुत अधिक योगदान होता है। किसी भी चुनौतीपूर्ण कार्य को करने के लिए प्रेरणा एक उत्प्रेरक की तरह कार्य करती है।
प्रभावी प्रदर्शन के लिए अच्छी फिजिकल फिटनेस, अच्छी स्किल, अच्छी सुविधाएं आधारभूत आवश्यकताएं होती हैं परंतु अगर इनके साथ उचित प्रेरणा का समावेश ना हो तो कई बार खिलाड़ी उच्च कोटि का अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते।
कई अच्छे खिलाड़ी इसलिए भी अपना उच्चतम प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं क्योंकि उन्हें ट्रेनिंग के दौरान उन्हें कभी भी यह नहीं बताया जाता अथवा यह अनुभव नही कराया जाता है कि उनकी अधिकतम क्षमता कितनी है और वे किस हद तक जा सकते हैं, जिस कारण से एक सीमा (Limit) के बाद वे हतोत्साहित (Demotivated) होने लगते हैं।
जबकि इसके विपरीत यह देखा गया है कि यदि प्रेरणा का स्तर बहुत ऊंचा हो तो कई बार खिलाड़ी सीमित क्षमताओं एवं कम संसाधनों व सुविधाओं के साथ भी उच्च कोटि का प्रदर्शन कर देते हैं।
अतः कह सकते हैं कि सफलता एवं प्रेरणा के बीच में बहुत गहरा संबंध होता है।
प्रसिद्ध खेल मनोवैज्ञानिक आर.एन. सिंगर ने प्रेरणा की उपयोगिता को एक समीकरण से प्रदर्शित किया है
प्रदर्शन = सीखना + प्रेरणा
Performance = Learning + Motivation
इस समीकरण से स्पष्ट है कि सीखने के साथ-साथ प्रेरणा का होना भी अति आवश्यक है तभी एक खिलाड़ी उच्च कोटि का प्रदर्शन कर सकता है।
विद्यार्थी/खिलाड़ी को प्रेरित करने के विभिन्न तरीके 
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पुरस्कार एवं दंड
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प्रशंसा एवं आलोचना।
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प्रतिस्पर्धा (दूसरों से और स्वंय से भी)
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सफलता एवं उपलब्धियों के रिकार्ड को प्रदर्शित करना
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खिलाड़ियों की रैंकिंग निर्धारित करना
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लक्ष्य का निर्धारण करना
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अच्छे संसाधन एवं सुविधाओं की व्यवस्था
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निरंतर फीडबैक देना
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सुदृढ़ीकरण reinforcement
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सफलता एवं विफलताओं की भावनाओं से परिचित कराना
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छात्रवृत्ति प्रदान करना
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स्व मूल्यांकन (self assessment) के लिए प्रेरित करना
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श्रव्य दृश्य साधनों व आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग
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कोच एवं अध्यापक को छात्र के लिए आदर्श होना चाहिए

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