Types Of Joints And Their Movements

Their are different types of joints and their movements in human body. Joints are the places in the body where two bones meet. Joints are a part of the skeletal system. An adult human body has a total of 206 bones which join together in various ways to form the skeleton. The skeleton provides shape to the body and makes mechanical movements of the body possible such as walking, lifting weights, climbing stairs, etc.

 

Types of Joints and Their Movements
Types of Joints and Their Movements

जोड़ अथवा संधि शरीर में वे स्थान होते हैं जहाँ पर दो या दो से अधिक हड्डियाँ मिलती हैं। जोड़ कंकाल तंत्र का हिस्सा हैं। एक वयस्क मनुष्य के शरीर में कुल 206 हड्डियाँ होती हैं जो कि आपस में विभिन्न प्रकार से जुड़ कर कंकाल का निर्माण करती हैं.

कंकाल ही शरीर को आकार प्रदान करता है तथा शरीर की यांत्रिक गतियों जैसे चलना, वजन उठाना, सीढ़ी चढ़ना आदि को संभव बनाता है  

संधियों के प्रकार (Types of Joints)

संधियों को उनकी गति के आधार पर तीन भागों में बांटा गया है 

  1. अचल संधि  Immovable Joints

  2. अर्द्ध चल संधि Semi Immovable Joints

  3. चल संधि  Freely movable Joints

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1- अचल संधि (Immovable Joints) (स्थिर जोड़) [Fixed, Fibrous, Synarthrosis]

अचल संधि में दो या दो से अधिक अस्थियां आपस में स्थिर रूप से जुड़ी रहती हैं व उनमें कोई भी गति नहीं होती।

उदाहरण: खोपड़ी के जोड़ (Suture), दातों के जोड़ (Gumphosis or Peg & Socket)

खोपड़ी के जोड़ (Suture) दातों के जोड़ (Gumphosis or Peg & Socket)
(a) खोपड़ी के जोड़ (Suture),                                                    (b) दातों के जोड़ (Gumphosis or Peg & Socket)

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2-अर्द्ध चल संधि (Semi Movable Joint)    [Cartilaginous, Amphiarthrosis]

वे जोड़ जिनमें बहुत ही कम अथवा सीमित गति होती है

उदाहरण: रीढ़ की हड्डी के जोड़, कूल्हे का जोड़

रीढ़ की हड्डी के जोड़
रीढ़ की हड्डी के जोड़

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3- चल संधि (Freely Movable Joints, Synovial, Diarthrosis)

चल संधि में वे सभी जोड़ आते हैं जो एक या एक से अधिक तलों (Planes) पर गतियां करते हैं। चल संधि के कारण ही शरीर के विभिन्न अंग गतियां करते हैं

 

चल संधियों को बनावट स्थिति एवं गतिशीलता के आधार पर इन्हें छह भागों में बांटा गया है 👇😍

  1. फिसलने वाले जोड़ (ग्लाइडिंग ज्वाइंट, Gliding Joints)

  2. पीवट जोड़ (Pivot) Joint –

  3. कब्जा संधि Hinge Joint-

  4. बाल व साकेट जोड़ Ball & Socket Joint-

  5. काठी जोड़ Saddle Joint-

  6. कंडोलोइड जोड़ Condyloid Joint-

Figure 38 03 04

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  1. फिसलने वाले जोड़ (ग्लाइडिंग ज्वाइंट, Gliding Joints)

इसमें संधि करने वाली अस्थियां एक दूसरे के ऊपर थोड़ा सा फिसलती है जैसे कलाई का जोड़ (कार्पल) और एड़ी (टार्सल) का जोड़

कलाई का जोड़ (कार्पल)
कलाई का जोड़ (कार्पल)

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2- पीवट जोड़ (Pivot Joint) एक हड्डी का सिरा दूसरी स्थिर हड्डी की सिरे पर घूमता (घूर्णन) है। जैसे सर्वाइकल (C1, C2) के ऊपर खोपड़ी घूमती है

Figure 38 03 07

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 3- कब्जा संधि Hinge Joint

कब्जा संधि में जुड़ने वाली अस्थियों के बीच किसी दरवाजे के कब्जे की तरह ही केवल एक ही तल (Plane) में गति संभव होती है जैसे कोहनी, घुटने और उंगलियों के जोड़

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4- बाल व साकेट जोड़ Ball & Socket Joint-

इस जोड़ में एक हड्डी का गेंद के आकार (Ball) का एक सिरा दूसरी अस्थि के गड्ढे नुमा आकृति (Socket) में फिट बैठ कर जोड़ की सभी तलों पर गतियां संभव करता है। जैसे कंधे और कूल्हे का जोड़ 

 

Ball and Socket joint of Shoulder

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5- काठी जोड़ Saddle Joint-

यह दो अस्थियों के उत्तल और अवतल सिरों के बीच बनने वाला जोड़ है, जिस प्रकार एक घुड़सवार घोड़े के ऊपर बैठा हो। जैसी अंगूठे कार्पल्स का जोड़

Figure 38 03 09

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6- कंडोलोइड जोड़ Condyloid Joint

कंडोलोइड जोड़ को दीर्घवृत्ताकार जोड़ के रूप में भी जाना जाता है, यह कुछ सीमा तक बॉल और सॉकेट जोड़ के समान ही होता है परन्तु इसमें जोड़ पूरी तरह से वृत्ताकार गति नहीं कर सकता है। यह सामने और पीछे की और एक तरफ से दूसरी तरफ घूमता है। इस प्रकार की जोड़ में दो तलों में गतिया संभव होती है . कलाई का जोड़ कंडोलोइड जोड़ का एक आदर्श उदाहरण है।

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जोड़ों की गतियां (Movements of Joints)

फ्लैक्शन – मोड़ना – Flexion

इसमें दो अस्थियां एक दूसरे के निकट आती हैं वह उनके बीच का कोण कम होता है, जैसे कोहनी और उंगलियों का मोड़ना

 

Flexion Movement of Joint
Flexion Movement of Joint

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एक्सटेंशन – विस्तारण – Extension –

यह फ्लैक्शन की विपरीत गति है. इसमें मुड़ी हुई अस्थियां एक दूसरे से दूर जाती है और उनकी बीच का कोण बढ़ता जाता है जैसे मुड़ी कोहनी व उंगलियों को सीधा करना 

 

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बाहर की ओर उठाना  (एबडक्शन – Abduction) – अंग की शरीर की मध्य रेखा से बाहर की ओर गति

 

बाहर की ओर से मध्य रेखा की ओर गति (एडक्शन – Adduction) – भीतर की ओर (शरीर की मध्य रेखा की ओर) गति

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रोटेशन – चक्रावर्तन – Rotation इसमें एक अंग अपनी धुरी पर घूमता है जैसे सिर व धड़ का एक ओर से दूसरी ओर घूमना। यह पीवट जोड़ की गति है

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सर्कमडेक्शन – पर्यावर्तन – Circumduction –

सर्कमडेक्शन जोड़ पर कोणीय और घूर्णन गतियों का मिश्रण है जिसमें क्रमानुसार  flexion, abduction, extension, and adduction की क्रिया होती है जिससे जोड़ पर वृत्ताकार गति होती है जैसे कलाई को घुमाना

 

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सुपीनेशन – उत्तानन – Supination –

शरीर की पृष्ठ भाग को नीचे की तरफ रखना, जैसे पीठ के बल लेटना हथेली को ऊपर की तरफ करना

प्रोनेशन – अवतानन – Pronation शरीर को अथवा किसी अंग के कोमल भाग को नीचे की तरफ रखना जैसे पीठ के बल लेटना हथेली को नीचे की तरफ रखना

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प्लान्टर फ्लेक्सन एवं डोर्सी फ्लेक्सन (Planter Flexion and Dorsi Flexion) – 

प्लान्टर  फ्लेक्सन  में पैर के तलवों को नीचे की ओर डोर्सी फ्लेक्सन पैर के तलवों को ऊपर की करने की क्रिया की जाती है  

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इनवर्सन Inversion अंग को मध्य रेखा की तरफ लाना जैसे पैर के पंजों को अंदर की तरफ होना

इवर्सन Eversion शरीर के अंग को मध्य रेखा की से बाहर ले जाना जैसे पैर के पंजों को बाहर की तरफ मोड़ना

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